(Sing this to the tune of the original and enjoy!)
खामोशियाँ
सैलाब है
तुम डूब के देखो कभी
बस एक साँस
हो सीने में
एक गोता लगाओ कभी
ऐतबार है
दो फ़रिश्तों का
बातों में कह पाए ना
खामोशियाँ
तेरी-मेरी खामोशियाँ
खामोशियाँ
सिमटी हुई खामोशियाँ
कहर है कि है रूह में आँधी-सी छाई हुई
है चुप क्यों समंदर, कि लहरें शरमाई हुई
न तारें फ़लक तक दिखे, न दिखे चाँदनी
घटाओं ने छेड़ी है तन्हाई की रागिनी
खामोशियाँ
पर्वाज़ है
तुम उड़ के तो देखो ज़रा
खामोशियाँ
इक प्यास है
इसे महसूस कर लो ज़रा
ऐतबार है
दो फ़रिश्तों का
बातों में कह पाए ना
खामोशियाँ
तेरी-मेरी, खामोशियाँ
खामोशियाँ
सिमटी हुई, खामोशियाँ
है सूखी ये मिट्टी, है बेताब साहिल जहां
उसी रेत में है खिली लाख खामोशियाँ
तहलका मचा है, है छाया अँधेरा घना
दहकते अंगारों में खुद को ही कर दो फ़ना
खामोशियाँ
आफ़ताब है
तुम आँखें तो खोलो ज़रा
खामोशियाँ
इक आस है
तुम खुलकर तो माँगो ज़रा
ऐतबार है
दो फ़रिश्तों का
बातों में कह पाए ना
खामोशियाँ
तेरी-मेरी खामोशियाँ
खामोशियाँ
सिमटी हुई खामोशियाँ
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